आस्था और संस्कृति की धरोहर संगम नगरी बढ़ते जल स्तर से संकट में

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प्रयागराज: प्रयागराज संगम नगरी पर गंगा और यमुना के जल स्तर खतरे के निशान के ऊपर पहुंच गया। बढ़ते जलस्तर से पूरे प्रयागराज जिले में पानी का खतरा बनकर मंडरा रहा है।

निचले इलाकों में रहने वाले दहशत के माहौल में हैं।

बहुत सारे मोहल्ले को खाली कर दिया गया है। गंगा और यमुना के निचले इलाकों में मकानों को लोग खाली करके सुरक्षित स्थान पर जा रहे हैं।

वहीं प्रशासन की तरफ से किए गए राहत शिविर में काफी लोगों को पहुंचाया गया। गंगा नदी ने मंगलवार शाम 4 बजे खतरे के निशान को पार कर लिया।

प्रशासनिक सूचना से बताया जा रहा है चंबल नदी से 26 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इसके कारण यमुना नदी का जलस्तर और भी बढ़ेगा।

शहर पर मंडरा रहे बाढ़ के खतरे को देखते हुए आपका की परिस्थितियों से निपटने के लिए प्रशासन ने एनडीआरएफ की 2 टीम और मांगी है।

गंगा यमुना के जलस्तर ने अब तक निचले इलाकों में दो से तीन लाख की आबादी को अपनी चपेट में ले लिया है।

कछारी इलाकों की बस्तियों में बने नए नए मकानों में बाढ़ का पानी घुस गया है।

प्रयागराज जिले के सलोरी गंगानगर, गौस नगर, द्रौपदी घाट, बेली कछार, छोटा बघाड़ा, दारागंज, चांदपुर सलोरी, फाफामऊ, शांति पुरम सेक्टर ए, राजा पुर ,करेलाबाग, नैनी, झूसी, तेलियरगंज, रसूलाबाद, बेली गांव ,छतनाग, और गंगा यमुना के निचले और कछारी क्षेत्र पुराने वाले सैकड़ों गांव बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं।

गंगा और यमुना का पानी उफान पर होने से बड़ी मात्रा में धान की फसल का भी नुकसान हुआ है। किसानों का कहना है कि आए हुए इस बाढ़ संकट से जानवरों के चारे की बहुत बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है। जब धान की फसल ही नष्ट हो गई तो पियरा कहां से आएगा।

जानवर का चारा बाढ़ की चपेट में आ गया। कछारी  क्षेत्रों में हरी घास की वजह से काफी जानवर अपना पेट भरते थे। और बाढ़ की वजह से सारे जानवर अब सड़कों पर दिखाई दे रहे हैं। प्रशासन ने अपनी भरपूर कोशिश शुरू कर दी है।

किसी तरीके से किसी भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में हर संभव मदद करने के लिए तैयार है। और अब बाढ़ क्षेत्र के इलाकों का राहत कार्य सेना ने अपने हाथ में ले लिया है।

हालांकि प्रशासन ने सभी अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं। की बाढ़ क्षेत्रों में जरा भी लापरवाही न बरती जाए। बाढ़ पीड़ितों को हर संभव मदद करके उनको सही स्थान पर राहत शिविरों में पहुंचाया जाए। उनकी हर संभव मदद की जाए।

बाढ़ क्षेत्र का खुद मुआयना  जिला अधिकारी भानु चंद्र गोस्वामी कर रहे हैं। राहत शिविरों का भी दौरा कर रहे हैं । सुविधाओं में कोई कमी ना हो संबंधित अधिकारियों को निर्देश दे रहे हैं। एनडीआरएफ की कई टीमें अपने कार्य को बखूबी कर रही हैं। ब्यूरो रिपोर्ट

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