उप स्वास्थ्य केंद्र बना खंडहर कैसे मिलेगा 50 करोड़ को स्वस्थ बीमा

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उरई (जालौन) 20 -25 हजार की आबादी बाली ग्राम पंचायत बंगरा में एएनएम सप्ताह में दो दिन और महीने में आठ दिन महिलाओं की सेहत देखने जिला मुख्यालय से पहुंचती है लेकिन पगार पूरे महीने भर की लेती है। कहने के लिये गांव में कई साल पूर्व उप स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण कराया गया था लेकिन उसमें बनने के बाद एक दिन भी स्वास्थ्य कर्मी नहीं बैठे।

आज उप स्वास्थ्य केंद्र पूरी तरह से खंडहर में बदला हुआ नजर आता है। हालत यह है कि उसमें न तो जंगले हैं और ही दरवाजे हैं। वह कहां चले गये कोई बताने को तैयार नहीं है। शासन द्वारा हजारों की आबादी वाले ग्राम बंगरा में कहने के लिये लाखों रुपये खर्च करके उप स्वास्थ्य केंद्र जिसे जच्चा बच्चा केंद्र भी कहते हैं। वह देख-रेख के अभाव में आज पूरी तरह से खंडहर हो रहा है।

एक ओर जहां सालों से उसकी पुताई कराया जाना जरूरी नहीं समझा गया तो वहीं उसमें आज तक किसी स्वास्थ्य कर्मी ने भी बैठना जरूरी नहीं समझा। कहने के लिये गांव में एएनएम रमा पाल की तैनाती है।

वह जिला मुख्यालय पर निवास करती है और सप्ताह में दो दिन गांव पहुंचकर महिलाओं को आवश्यक सलाह देती है साथ ही गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण भी करते हैं। इस तरह से वह एक महीने में बमुश्किल 8 दिन अपने तैनाती गांव में पहुंचती है लेकिन वह सरकार से पगार पूरे महीने की लेती है।

ऐसी स्थिति में गांव की आधी आबादी को कोई स्वास्थ्य संबंधी समस्या होती है तो वह या तो जिला मुख्यालय या फिर ग्वालियर परिजनों के साथ जाने को विवश होती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि एक ओर जहां प्रदेश सरकार महिलाओं की सेहत के प्रति फिक्रमंद हैं लेकिन जमीनी स्तर पर आज भी स्थितियां वैसी ही है जो एक दशक पूर्व हुआ करती थी। ऐसा ही हाल ग्राम कुदारी, रेढ़र, नावली के उप स्वास्थ्य केंद्रों का है।

चूंकि उक्त गांव बीहड़ क्षेत्र में आते हैं लिहाजा ऐसे गांवों में स्वास्थ्य महकमे के आला अधिकारी भी निरीक्षण करने नहीं पहुंचते हैं। यही कारण है कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी महिलाओं की सेहत भगवान भरोसे रहती है।