न्यायालय के आदेश पर सेना ने खाली करायी कब्जे की जमीन

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झांसी । इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश के बाद सेना ने पुलिस और प्रशासन के सहयोग से अपनी जमीन पर किये गये अवैध निर्माण ढहा दिये हैं। सेना की जमीन पर अनाधिकृत तरीके से भवनों का निर्माण कार्य कर अतिक्रमण कर लिया गया था। यह कब्जा 46 साल से चल रहा था। इस कार्रवाई को लेकर सेना की जमीन पर अवैध रुप से कब्जा किए लोगों में हड़कंप मच गया है। इसमें होटल संचालक भी शामिल है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि सदर बाजार थाना क्षेत्र में बीएसओ कार्यालय के पास सेना का फर्नीचर यार्ड बना हुआ हैं।

इस यार्ड के प्लाट नंबर 177 पर विजय गुप्ता ने वर्ष 1972 में कब्जा कर लिया था क्योंकि उक्त व्यक्ति ठेकेदारी करता था। पहले उसने स्टोर बनाया था। इसके बाद खुद के रहने के लिए पक्का मकान बना लिया था। धीरे-धीरे उसने मजदूरी करने आने वाले लोगों के लिए कालोनी बना दी थी। यह सभी कार्य अवैध तरीके से किया गया था। इस अवैध निर्माण की जानकारी सेना के अफसरों को हुई तो उन्होंने 7 फरवरी 1986 को ठेकेदार विजय कुमार गुप्ता को पीपी एक्ट के तहत नोटिस जारी किया था। इस नोटिस पर ठेकेदार ने स्थगन आदेश ले रखा था।

मार्च 2007 में उच्च न्यायालय ने स्थगन आदेश रद्द कर झांसी कैंट के पक्ष में फैसला दे दिया था। इसके बाद ठेकेदार ने फिर से अदालत में याचिका दायर कर दी थी। अदालत ने दोनों पक्षों को सुना और कागजात देखे तो ठेकेदार की गलती मानी गई थी। इसके तहत उच्च न्यायालय ने 25 जनवरी 2018 को अवैध निर्माण को हटाने का आदेश दिया था।

अदालत ने स्पष्ट कहा था कि सेना के अफसर ही ठेकेदार को भवन खाली करने के लिए समय दे सकते हैं। इसके तहत ठेकेदार ने दो माह का समय मांगा था। इस पर कैंट अफसरों ने ठेकेदार को समय दे दिया था। दो माह पूर्ण होने पर सेना के अफसर सोमवार की सुबह जेसीबी मशीन लेकर वहां पहुंचे। साथ ही प्रशासन और पुलिस की टीम भी मौके पर मौजूद थी। बवाल की आशंका को देखते हुए काफी मात्रा में पुलिस फोर्स व सेना के जवान तैनात किए गए थे। जेसीबी मशीन से सेना ने अवैध निर्माणा ढहा दिया।

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